Class 9 Hindi Ganga Chapter 7 Mein aur Mera Desh, कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का विचारप्रधान और प्रेरणात्मक निबंध है। इसमें लेखक ने व्यक्ति और देश के बीच के गहरे संबंध को स्पष्ट किया है।
निबंध में लेखक ने नागरिक के अधिकारों, कर्तव्यों, देश के सम्मान, शक्ति-बोध, सौंदर्य-बोध और उचित नेतृत्व जैसे विषयों पर विचार किया है।
Mein aur Mera Desh worksheet
‘मैं और मेरा देश’ निबंधमें लेखक ने व्यक्ति और देश के बीच के गहरे संबंध को स्पष्ट किया है। लेखक के अनुसार व्यक्ति की पहचान केवल उसके घर, परिवार या नगर तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह अपने देश की पहचान और सम्मान से भी जुड़ी होती है। इसलिए प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपने आचरण और कार्यों से देश के सम्मान तथा शक्ति को बढ़ाए।
लेखक आगे कहता है कि देश के लिए काम करना केवल बड़े वैज्ञानिकों, धनवानों या महान व्यक्तियों का काम नहीं है। हर सामान्य नागरिक भी देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। जीवन एक युद्ध के समान है और युद्ध में केवल सैनिकों का लड़ना ही आवश्यक नहीं होता; किसान, श्रमिक और सहयोग देने वाले सभी लोगों की अपनी भूमिका होती है। इसी प्रकार देश की उन्नति में हर नागरिक का योगदान आवश्यक है।
लेखक के अनुसार नागरिक की श्रेष्ठता और देश की उन्नति की एक महत्वपूर्ण कसौटी चुनाव भी है। नागरिकों को सही व्यक्ति को अपना मत देना चाहिए और गलत प्रभाव में आकर निर्णय नहीं लेना चाहिए।
निबंध की विशेषता इसकी प्रश्नोत्तर/संवादात्मक शैली भी है, जिसमें लेखक स्वयं प्रश्न उठाकर उनके उत्तर देता है।
अध्याय का संदेश
इस निबंध का मूल संदेश है कि हर नागरिक अपने देश का प्रतिनिधि है। देश का सम्मान और नागरिक का सम्मान एक-दूसरे से जुड़े हैं। इसलिए हमें अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझना चाहिए और अपने प्रत्येक कार्य से देश की शक्ति, प्रतिष्ठा, स्वच्छता और संस्कृति को मजबूत करना चाहिए।
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लेखक परिचय – कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ हिंदी के प्रसिद्ध निबंधकार थे। उनका जन्म 1906 ई. में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हुआ था। उनका मुख्य कार्यक्षेत्र पत्रकारिता था। उन्होंने नया जीवन और विकास पत्रों का संपादन किया।
स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक कार्यों में भाग लेने के कारण उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक जीवन से जुड़े अनेक निबंध लिखे। उनकी उत्कृष्ट साहित्यिक रचनाओं के लिए उन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया। उनका निधन 1995 ई. में हुआ।
Class 9 Hindi Ganga Chapter 7 Question Answer
प्रश्न 1. लेखक को अपने जीवन की पूर्णता का अनुभव कब हुआ?
उत्तर:
लेखक को लगा कि उसका जीवन पूर्ण हो गया है जब उसके पास अपना घर, पड़ोस और नगर था। उसे पड़ोसियों का स्नेह, नगर का ज्ञान और समाज का सहयोग प्राप्त था। उसे लगता था कि अब उसे जीवन में किसी और चीज की आवश्यकता नहीं है।
प्रश्न 2. लेखक के मानस में ‘भूकंप’ कैसे आया?
उत्तर:
लेखक के मानस में ‘भूकंप’ महान स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय के अनुभव से आया। लाला लाजपत राय ने बताया था कि विदेशों में घूमने पर भी भारत की गुलामी का कलंक उनके माथे पर लगा रहता था। इस अनुभव ने लेखक को समझाया कि व्यक्तिगत सुख-सुविधाएँ तब तक गौरव नहीं दे सकतीं, जब तक देश सम्मानित और स्वतंत्र न हो।
प्रश्न 3. जापानी युवक ने स्वामी रामतीर्थ से फलों के बदले क्या माँगा?
उत्तर:
जापानी युवक ने फलों के बदले कोई धन नहीं माँगा। उसने केवल यह इच्छा व्यक्त की कि स्वामी रामतीर्थ जापान लौटकर यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। इससे उसके देश के प्रति प्रेम और गौरव की भावना प्रकट होती है।
Mein aur mera desh Question Answer
प्रश्न 4. लेखक के अनुसार ‘शक्ति-बोध’ और ‘सौंदर्य-बोध’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
लेखक के अनुसार देश के प्रत्येक नागरिक को ऐसे कार्य करने चाहिए जिनसे देश की शक्ति और आत्मविश्वास मजबूत हों तथा उसकी सुंदरता, स्वच्छता और संस्कृति सुरक्षित रहें।
अपने देश को लगातार दूसरे देशों से हीन बताना और उसकी कमजोरियों को बढ़ाना देश के सामूहिक मानसिक बल को कमजोर करता है। इसी प्रकार सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाना, कूड़ा फेंकना, अशिष्ट भाषा का प्रयोग करना या सार्वजनिक स्थानों को खराब करना देश के सौंदर्य-बोध और संस्कृति को नुकसान पहुँचाता है।
इसलिए नागरिक को अपने व्यवहार में आत्मसम्मान, जिम्मेदारी, स्वच्छता और शिष्टता बनाए रखनी चाहिए।
प्रश्न 5. लेखक नागरिक के अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में क्या विचार प्रस्तुत करता है?
उत्तर:
लेखक के अनुसार नागरिक के अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। नागरिक का कर्तव्य है कि वह ऐसा कोई काम न करे जिससे देश की स्वतंत्रता, सम्मान या शक्ति को नुकसान पहुँचे। उसे अपने छोटे-से-छोटे कार्य में भी देश के हित का ध्यान रखना चाहिए।
साथ ही नागरिक का अधिकार है कि उसे अपने देश के सम्मान और उसकी शक्तियों का पूरा लाभ मिले। चुनाव के संदर्भ में भी लेखक नागरिक के कर्तव्य पर बल देता है कि उसे योग्य व्यक्ति को अपना मत देना चाहिए। इस प्रकार लेखक जिम्मेदार, जागरूक और देशहित में कार्य करने वाले नागरिक की कल्पना करता है।