Class 9 Hindi Chapter 6 Reedh ki Haddi, जगदीशचंद्र माथुर द्वारा रचित एक प्रभावशाली सामाजिक एकांकी है। इसमें उस समय के भारतीय समाज की उन रूढ़िवादी मानसिकताओं पर व्यंग्य किया गया है, जिनके कारण लड़कियों की शिक्षा, स्वतंत्र सोच और आत्मसम्मान को उचित महत्व नहीं दिया जाता था।
‘रीढ़ की हड्डी’ केवल शरीर का अंग नहीं, बल्कि व्यक्ति के आत्मसम्मान, नैतिक दृढ़ता और साहस का प्रतीक है।
Reedh ki Haddi worksheet
एकांकी में उमा एक शिक्षित, आत्मसम्मानी और साहसी युवती है। उसके विवाह के लिए आए गोपालप्रसाद और उनके पुत्र शंकर लड़की को उसकी शिक्षा और व्यक्तित्व के आधार पर नहीं, बल्कि सुंदरता, घरेलू कार्यों और अन्य बाहरी गुणों के आधार पर परखना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि उनकी बहू अधिक पढ़ी-लिखी न हो।
उमा अंत में इस अपमानजनक मानसिकता का विरोध करती है। वह स्पष्ट रूप से कहती है कि लड़कियाँ कोई ऐसी वस्तु नहीं हैं जिन्हें खरीदने से पहले परखा जाए। वह शंकर के चरित्र और साहस पर भी प्रश्न उठाती है। पाठ में भी उमा को शिक्षित और सशक्त महिला के प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
अध्याय का संदेश
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी का मुख्य संदेश यह है कि लड़कियों को वस्तु की तरह परखना और उनकी शिक्षा, स्वतंत्र सोच तथा व्यक्तित्व को विवाह में बाधा मानना गलत है। समाज में स्त्री और पुरुष दोनों को समान सम्मान और अवसर मिलना चाहिए।
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लेखक परिचय – जगदीशचंद्र माथुर
जगदीशचंद्र माथुर का जन्म 1917 में शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और बाद में इंडियन सिविल सर्विस में भी चयनित हुए। उन्होंने बिहार राज्य के शिक्षा सचिव, आकाशवाणी के महानिदेशक तथा सूचना और प्रसारण मंत्रालय में संयुक्त सचिव जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्य किया।
उनकी प्रमुख कृतियों में ‘भोर का तारा’, ‘कोणार्क’, ‘ओ मेरे सपने’, ‘शारदीया’, ‘पहला राजा’, ‘दस तस्वीरें’ और ‘जिन्होंने जीना जाना’ शामिल हैं। उनकी संपूर्ण रचनाएँ चार खंडों में ‘जगदीशचंद्र माथुर रचनावली’ के रूप में संकलित हैं। ‘कोणार्क’ उनका अत्यंत चर्चित नाटक है। 1978 में उनका निधन हुआ।
Class 9 Hindi Ganga Chapter 6 Question Answer
प्रश्न 1. ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी का मुख्य विषय क्या है?
उत्तर:
‘रीढ़ की हड्डी’ का मुख्य विषय समाज में प्रचलित रूढ़िवादी विवाह-व्यवस्था और स्त्री-शिक्षा के प्रति संकीर्ण सोच का विरोध करना है। एकांकी यह संदेश देता है कि लड़कियों को वस्तु की तरह परखना या उनकी शिक्षा को विवाह में बाधा मानना अनुचित है।
प्रश्न 2. गोपालप्रसाद कैसी लड़की को अपनी बहू बनाना चाहते थे?
उत्तर:
गोपालप्रसाद ऐसी लड़की को अपनी बहू बनाना चाहते थे जो अधिक पढ़ी-लिखी न हो। उनका मानना था कि महिलाओं की शिक्षा सीमित होनी चाहिए और उन्हें पुरुषों की तरह उच्च शिक्षा प्राप्त करके स्वतंत्र विचार व्यक्त नहीं करने चाहिए।
प्रश्न 3. उमा के चेहरे पर चश्मा देखकर गोपालप्रसाद और शंकर क्यों चौंक गए?
उत्तर:
गोपालप्रसाद और शंकर चश्मे को उमा की अधिक पढ़ाई का संकेत मानकर चौंक गए। उन्हें डर था कि उमा उनकी अपेक्षा से अधिक शिक्षित है, जबकि वे ऐसी लड़की चाहते थे जो अधिक पढ़ी-लिखी न हो।
प्रश्न 4. उमा ने लड़कियों की तुलना भेड़-बकरियों से क्यों की?
उत्तर:
उमा ने यह तुलना इसलिए की क्योंकि विवाह के लिए लड़के वाले लड़की को एक वस्तु की तरह देखते और उसकी सुंदरता तथा अन्य गुणों को परखते हैं। उमा इस व्यवहार का विरोध करती है और याद दिलाती है कि लड़कियों के भी दिल, भावनाएँ और आत्मसम्मान होते हैं।
Reedh ki Haddi Question Answer
प्रश्न 5. उमा के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
उमा इस एकांकी की सबसे प्रभावशाली पात्र है। उसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
- शिक्षित – वह कॉलेज में पढ़ी है और बी.ए. पास है।
- आत्मसम्मानी – वह अपने सम्मान के साथ समझौता नहीं करती।
- साहसी – वह गोपालप्रसाद जैसे रूढ़िवादी व्यक्ति के सामने भी अपनी बात कहने से नहीं डरती।
- स्वतंत्र विचारों वाली – वह विवाह में लड़की को वस्तु की तरह परखे जाने का विरोध करती है।
- न्यायप्रिय – वह लड़कियों के अधिकार और भावनाओं के पक्ष में आवाज उठाती है।
उमा का चरित्र उस नई शिक्षित महिला का प्रतिनिधित्व करता है जो अपने अधिकारों और आत्मसम्मान के प्रति जागरूक है। PDF की प्रस्तावना भी उमा को पढ़ी-लिखी और सशक्त महिला का प्रतिनिधि बताती है।
प्रश्न 6. ‘रीढ़ की हड्डी’ में लेखक ने सामाजिक रूढ़ियों पर किस प्रकार व्यंग्य किया है?
उत्तर:
लेखक ने हास्य और व्यंग्यपूर्ण संवादों के माध्यम से सामाजिक रूढ़ियों पर प्रहार किया है। गोपालप्रसाद स्वयं पढ़े-लिखे हैं, लेकिन लड़कियों की शिक्षा का विरोध करते हैं। वे चाहते हैं कि उनकी बहू अधिक पढ़ी-लिखी न हो।
विवाह के लिए लड़की को सुंदरता, पहनावे, संगीत, घरेलू कार्य आदि के आधार पर परखा जाता है। लड़की की भावनाओं और विचारों को महत्व नहीं दिया जाता। इस मानसिकता को उमा के तीखे संवादों के माध्यम से चुनौती दी गई है।
इस प्रकार लेखक ने विवाह में दिखावे, स्त्री-शिक्षा के विरोध और लड़की को वस्तु समझने वाली मानसिकता पर व्यंग्य किया है। पाठ की प्रस्तावना में भी पारंपरिक विवाह-व्यवस्था तथा स्त्री-शिक्षा संबंधी रूढ़िगत सोच को एकांकी के प्रमुख विषय के रूप में बताया गया है।