Ganga class 9 Chapter 11 Jhansi ki Rani worksheet

Hindi Class 9 Chapter 11 Jhansi ki Rani सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रसिद्ध वीर-रस प्रधान कविता है। इसमें 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि में रानी लक्ष्मीबाई के जीवन, संघर्ष, साहस और बलिदान का ओजपूर्ण वर्णन किया गया है। कविता लक्ष्मीबाई के बचपन से लेकर उनके विवाह, पति की मृत्यु, अंग्रेज़ों द्वारा झाँसी पर अधिकार करने के प्रयास और अंततः युद्धभूमि में वीरगति प्राप्त करने तक की घटनाओं को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करती है।

यह कविता कथात्मक कविता है, क्योंकि इसमें कविता के साथ कहानी के तत्व जुड़े हुए हैं और घटनाएँ एक निश्चित क्रम में आगे बढ़ती हैं।

Jhansi ki Rani worksheet

कविता की शुरुआत 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि से होती है। अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध पूरे देश में असंतोष बढ़ रहा था और लोगों में स्वतंत्रता की भावना जाग उठी थी। इसी वातावरण में रानी लक्ष्मीबाई की वीरगाथा सामने आती है, जिसे बुंदेलखंड के हरबोलों ने जन-जन तक पहुँचाया।

लक्ष्मीबाई का बचपन सामान्य बालिकाओं से अलग था। वे नाना साहब के साथ पढ़ती-खेलती थीं और बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी, घुड़सवारी तथा युद्ध-कौशल में रुचि रखती थीं। विवाह के बाद वे झाँसी की रानी बनीं, पर राजा की मृत्यु के बाद उनके जीवन में संकट आ गया।

डलहौजी ने झाँसी पर अधिकार करने का प्रयास किया, जिससे अंग्रेज़ों के विरुद्ध जनाक्रोश और बढ़ गया। देश के अनेक भागों में विद्रोह फैल गया और नाना साहब, तात्या टोपे, अज़ीमुल्ला, अहमद शाह मौलवी तथा कुँवर सिंह जैसे वीर स्वतंत्रता-संग्राम में सक्रिय हुए। रानी लक्ष्मीबाई ने भी अंग्रेज़ों का डटकर सामना किया और कालपी तथा ग्वालियर तक अपना संघर्ष जारी रखा।

अंत में रानी शत्रुओं से घिर गईं, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और वीरतापूर्वक लड़ते हुए केवल तेईस वर्ष की आयु में वीरगति प्राप्त की। उनका बलिदान भारतवासियों में स्वतंत्रता, साहस और देशप्रेम की भावना जगाता है। इसीलिए रानी लक्ष्मीबाई भारतीय इतिहास में नारी-शक्ति और वीरता की अमर प्रतीक बन गईं।

भाषा एवं शैली की विशेषताएँ

कविता की भाषा सरल, सहज, ओजपूर्ण और प्रभावशाली है। इसमें वीर रस की प्रधानता है। कथात्मक शैली के कारण घटनाएँ क्रमशः आगे बढ़ती हैं। बार-बार आने वाला “बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी / खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी” जैसा टेक कविता को गेय और स्मरणीय बनाता है।

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लेखक परिचय – सुभद्रा कुमारी चौहान

सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म 1904 में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा भी प्रयागराज में हुई। वे प्रसिद्ध साहित्यकार होने के साथ-साथ स्वतंत्रता सेनानी भी थीं। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से जनमानस में राष्ट्रीय चेतना जगाई। उनके साहित्य में देशप्रेम, स्त्री-केंद्रित विषयों और स्वतंत्रता-संग्राम के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट दिखाई देती है। उनकी भाषा सहज और सरल होने के कारण उनकी रचनाएँ अत्यंत लोकप्रिय हुईं।

उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘मुकुल’, ‘त्रिधारा’, ‘बिखरे मोती’, ‘उन्मादिनी’, ‘सीधे-सादे चित्र’, ‘कदंब का पेड़’ और ‘सभा का खेल’ शामिल हैं। उन्हें कविता-संग्रह मुकुल तथा कहानी-संग्रह बिखरे मोती के लिए दो बार ‘सेकसरिया पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। 1948 में उनकी आकस्मिक मृत्यु हुई। भारतीय डाक विभाग ने उनके सम्मान में एक डाक टिकट भी जारी किया।

Class 9 Hindi Chapter 11 Question Answer

प्रश्न 1. लक्ष्मीबाई के बचपन की क्या विशेषताएँ थीं?
उत्तर: लक्ष्मीबाई का बचपन सामान्य बालिकाओं से अलग था। वे नाना साहब के साथ पढ़ती और खेलती थीं। उन्हें बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी चलाने का अभ्यास था। वे युद्ध-कौशल, शिकार और व्यूह-रचना जैसे कार्यों में रुचि रखती थीं। वीर शिवाजी की गाथाएँ भी उन्हें याद थीं। इसलिए बचपन से ही उनमें वीरता और साहस के गुण विकसित हो गए थे।

प्रश्न 2. ‘नई जवानी’ से कवयित्री का क्या आशय है?
उत्तर: ‘नई जवानी’ से आशय भारतवासियों में उत्पन्न नई ऊर्जा, उत्साह और विद्रोह की भावना से है। 1857 के समय भारतीयों में अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता प्राप्त करने का जोश जाग उठा था। यही जागृति देश में नई चेतना का प्रतीक थी। कविता के अभ्यास में भी ‘नई जवानी’ को ‘विद्रोह की चिंगारी’ के भाव से जोड़ा गया है।

प्रश्न 3. रानी लक्ष्मीबाई को ‘छबीली’ क्यों कहा गया है?
उत्तर: ‘छबीली’ शब्द लक्ष्मीबाई के सुंदर, आकर्षक और सजीले व्यक्तित्व को व्यक्त करता है। पाठ की शब्द-संपदा में ‘छबीली’ का अर्थ तेजस्वी, सुंदर, छबी वाली और सजीली बताया गया है।

प्रश्न 4. ‘बुझा दीप झाँसी का’ से क्या आशय है?
उत्तर: ‘बुझा दीप झाँसी का’ से झाँसी के राजा की मृत्यु और उसके बाद उत्पन्न संकट की ओर संकेत है। राजा की मृत्यु के बाद झाँसी की राजनीतिक स्थिति कमजोर हो गई और अंग्रेज़ों को राज्य पर अधिकार करने का अवसर मिल गया। कविता में इसके बाद डलहौजी द्वारा झाँसी को हड़पने का वर्णन किया गया है।

प्रश्न 5. रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेज़ों के विरुद्ध किस प्रकार संघर्ष किया?
उत्तर: रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेज़ों के सामने आत्मसमर्पण नहीं किया। उन्होंने अपनी सेना का नेतृत्व किया और युद्धभूमि में स्वयं तलवार लेकर लड़ीं। उन्होंने अंग्रेज़ सैनिकों का सामना करते हुए झाँसी, कालपी और ग्वालियर के संघर्षों में वीरता दिखाई। अंत तक वे शत्रुओं से लड़ती रहीं और युद्धभूमि में वीरगति को प्राप्त हुईं।

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